राजा संसार चंद (1775-1823) कांगड़ा रियासत के कछवाहा वंश के एक प्रतापी शासक थे। वे कांगड़ा चित्रकला के सबसे बड़े संरक्षक माने जाते हैं और उन्हें "कांगड़ा का अकबर" भी कहा जाता है। उनके शासनकाल में कांगड़ा शैली की चित्रकला अपने स्वर्णिम युग में पहुँची।
संसार चंद का शासन और उपलब्धियाँ:
1. कांगड़ा राज्य का विस्तार:
18वीं शताब्दी के अंत और 19वीं शताब्दी की शुरुआत में उन्होंने अपने राज्य का विस्तार किया और पंजाब के कुछ हिस्सों पर भी अधिकार कर लिया।
उन्होंने मुगलों, अफगानों और गोरखाओं से संघर्ष किया।
2. कांगड़ा किला और रणजीत सिंह:
संसार चंद ने कांगड़ा किले पर नियंत्रण स्थापित किया, जो सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण था।
1809 में, जब गोरखा सेनाओं ने उन्हें चुनौती दी, तो उन्होंने महाराजा रणजीत सिंह से सहायता मांगी। रणजीत सिंह ने गोरखाओं को हरा दिया, लेकिन बाद में कांगड़ा किले पर स्वयं कब्जा कर लिया।
3. कांगड़ा चित्रकला का संरक्षण:
संसार चंद ने कलाकारों को संरक्षण दिया, जिससे कांगड़ा शैली की चित्रकला अपने उत्कर्ष पर पहुँची।
इस शैली में राधा-कृष्ण, नायक-नायिका भेद और पौराणिक कथाओं के चित्र बनाए गए।
4. मुगल और मराठा प्रभाव:
उनके शासनकाल में कांगड़ा पर मराठों और मुगलों का भी प्रभाव रहा, लेकिन उन्होंने अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए संघर्ष किया।
मृत्यु:
राजा संसार चंद का निधन 1823 ईस्वी में हुआ। उनके बाद कांगड़ा पर सिख साम्राज्य और फिर अंग्रेजों का नियंत्रण हो गया।
कांगड़ा शैली, जो पहाड़ी चित्रकला की एक प्रसिद्ध शाखा है, 18वीं शताब्दी में अपने चरम पर थी। इसके कुछ प्रमुख चित्रकार और संरक्षणदाता इस प्रकार हैं:
प्रसिद्ध चित्रकार:
1. पात्रम दास – कांगड़ा शैली के शुरुआती चित्रकारों में से एक।
2. नैनसुख – 18वीं शताब्दी के महान चित्रकार, जिनका कार्य कांगड़ा शैली के विकास में महत्वपूर्ण रहा।
3. मनकू – नैनसुख के पुत्र, जिन्होंने कांगड़ा चित्रकला में अपनी अलग पहचान बनाई।
4. फत्तू – मनकू के पुत्र और कांगड़ा शैली के महत्वपूर्ण चित्रकार।
5. पुत्रु – फत्तू के पुत्र, जिन्होंने कांगड़ा चित्रकला को आगे बढ़ाया।
संरक्षणदाता:
1. राजा गोपाल सिंह (कांगड़ा) – कांगड़ा चित्रकला को बढ़ावा देने वाले प्रमुख शासकों में से एक।
2. राजा संसार चंद (1775-1823) – कांगड़ा चित्रकला का स्वर्ण युग इन्हीं के शासनकाल में आया।
कांगड़ा शैली में कृष्ण-लीला, नायक-नायिका भेद, राग-रागिनी और रामायण-महाभारत की कहानियाँ मुख्य रूप से चित्रित की जाती थीं। इसका प्रभाव मुगल और राजस्थानी चित्रकला से भी देखा जा सकता है।
राजा संसार चंद के शासनकाल में कांगड़ा शैली की चित्रकला अपने चरम पर पहुँची। इस दौरान कई प्रसिद्ध चित्र बनाए गए, जिनमें मुख्य रूप से राधा-कृष्ण की लीलाओं, नायक-नायिका भेद, रागमाला, रामायण-महाभारत के दृश्य और प्रकृति के सुंदर चित्रण शामिल हैं।
संसार चंद के समय के कुछ प्रसिद्ध चित्र:
1. गोपियों के साथ कृष्ण (Krishna with Gopis)
इस चित्र में भगवान कृष्ण को गोपियों के साथ खेलते और बांसुरी बजाते हुए दिखाया गया है।
हल्के रंगों, बारीक रेखाओं और प्राकृतिक पृष्ठभूमि का उपयोग किया गया है।
2. विरहिणी नायिका (Virahini Nayika)
इस चित्र में नायिका अपने प्रियतम के वियोग में दुखी होती है।
चंद्रमा, पेड़-पौधों और पक्षियों के माध्यम से भावनात्मक गहराई को दर्शाया गया है।
3. रागमाला शृंखला (Ragamala Paintings)
संगीत से प्रेरित चित्र, जिनमें अलग-अलग रागों को दर्शाने के लिए विभिन्न नायिकाओं और प्राकृतिक दृश्यों का प्रयोग किया गया है।
4. बारहमासा चित्रण (Barahmasa Paintings)
इसमें वर्ष के बारह महीनों को नायिका के अनुभवों और बदलते मौसम के साथ जोड़ा गया है।
5. भगवद गीता प्रसंग (Scenes from Bhagavad Gita)
अर्जुन और कृष्ण के संवाद को चित्रों के रूप में उकेरा गया।
6. शिव-पार्वती विवाह (Shiva-Parvati Vivah)
इस चित्र में शिव और पार्वती के विवाह का दृश्य बहुत ही सूक्ष्म और रंगीन तरीके से चित्रित किया गया है।
7. वन में कृष्ण-राधा (Krishna-Radha in the Forest)
इस चित्र में राधा-कृष्ण को एक सुंदर हरे-भरे वन में प्रेमालाप करते हुए दिखाया गया है।
विशेषताएँ:
कोमल रंगों का प्रयोग – हल्के हरे, गुलाबी, नीले और पीले रंग प्रमुखता से उपयोग किए गए।
प्राकृतिक सौंदर्य – पहाड़, नदियाँ, पेड़ और फूलों से सजी पृष्ठभूमि।
नरम रेखाएँ और भावनात्मक अभिव्यक्ति – पात्रों के चेहरे पर सूक्ष्म भावनाएँ उकेरी जाती थीं।
संसार चंद के संरक्षण में बनी कांगड़ा चित्रकला कृतियाँ आज भारत और विश्व के विभिन्न संग्रहालयों में सुरक्षित हैं।
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